Artemis-II मिशन क्या है? 50 साल बाद इंसान की चंद्रमा वापसी की पूरी कहानी (NASA Moon Mission) | Artemis-II Mission in Hindi | NASA का मानव चंद्र मिशन 2026
Artemis-II मिशन NASA का ऐतिहासिक मानव अंतरिक्ष अभियान है, जिसमें लगभग 50 वर्षों बाद इंसान फिर से चंद्रमा की ओर उड़ान भरेगा। यह मिशन Orion अंतरिक्ष यान और SLS रॉकेट के ज़रिए मानव को Deep Space में ले जाकर सुरक्षित वापसी का परीक्षण करेगा। यह मिशन भविष्य के चंद्र लैंडिंग और मंगल अभियानों की नींव रखेगा।NASA का Artemis-II मिशन क्या है? Orion यान, SLS रॉकेट, अंतरिक्ष यात्री, उद्देश्य और भविष्य के Moon Mission की पूरी जानकारी हिंदी में पढ़ें।
Artemis-II मिशन: चंद्रमा की ओर मानवता की ऐतिहासिक वापसी
Artemis-II मिशन आधुनिक मानव अंतरिक्ष इतिहास का एक ऐसा अध्याय है, जो न केवल विज्ञान और तकनीक की सीमाओं को आगे बढ़ाता है, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य को भी नई दिशा देता है। लगभग पाँच दशकों बाद पहली बार इंसान पृथ्वी की निचली कक्षा से बाहर, चंद्रमा की ओर यात्रा करेगा।
यह मिशन नासा के Artemis कार्यक्रम का दूसरा प्रमुख चरण है, जो Apollo युग के बाद मानव अंतरिक्ष उड़ान का सबसे महत्वाकांक्षी प्रयास माना जा रहा है। Artemis-II न केवल तकनीकी परीक्षण है, बल्कि यह मानव साहस, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भविष्य की अंतरग्रहीय यात्राओं का प्रतीक है।
Table of Contents
1. Artemis कार्यक्रम का विस्तृत परिचय
3. Artemis-I और Artemis-II में गहरा अंतर
4. Artemis-II मिशन के मुख्य उद्देश्य
5. Orion अंतरिक्ष यान: पूर्ण तकनीकी विवरण
6. Space Launch System (SLS) रॉकेट
7. Artemis-II के अंतरिक्ष यात्री
8. Artemis-II मिशन की उड़ान प्रोफ़ाइल (Flight Profile)
9. चंद्रमा तक की यात्रा और फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी
10. जीवन समर्थन प्रणाली (Life Support System)
12. सुरक्षा और आपातकालीन प्रणालियाँ
13. वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयोग
14. भविष्य के Artemis मिशनों में भूमिका
15. Artemis-II और भारत के लिए इसका महत्व
16. Artemis-II बनाम Apollo मिशन
17. Artemis-II मिशन की चुनौतियाँ और जोखिम
18. Artemis-II मिशन की वर्तमान स्थिति
1. Artemis कार्यक्रम का विस्तृत परिचय
Artemis कार्यक्रम नासा का एक दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अन्वेषण अभियान है, जिसका मुख्य लक्ष्य चंद्रमा पर मानव की स्थायी वापसी सुनिश्चित करना और भविष्य में मंगल ग्रह तक मानव मिशन भेजना है। यह कार्यक्रम केवल एक मिशन नहीं, बल्कि आने वाले कई दशकों की अंतरिक्ष रणनीति का आधार है।
Apollo मिशनों के दौरान मानव पहली बार चंद्रमा पर उतरा, लेकिन उस समय तकनीक सीमित थी और उद्देश्य मुख्यतः राजनीतिक और तकनीकी प्रदर्शन था। Artemis कार्यक्रम का उद्देश्य इससे कहीं आगे है। यह चंद्रमा को एक “टेस्टिंग ग्राउंड” के रूप में उपयोग करता है, जहाँ गहरे अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने की तकनीक विकसित की जाएगी।
Artemis नाम ग्रीक पौराणिक कथाओं की देवी Artemis से लिया गया है, जो Apollo की जुड़वां बहन थीं। यह नाम यह दर्शाता है कि यह कार्यक्रम Apollo मिशनों की उत्तराधिकारी है, लेकिन आधुनिक तकनीक, विविधता और स्थायित्व पर अधिक केंद्रित है।
Artemis कार्यक्रम के अंतर्गत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली महिला और पहले रंगीन व्यक्ति को उतारने की योजना है, जो मानव अंतरिक्ष इतिहास में समानता और समावेशन का प्रतीक बनेगा।

2. Artemis-II मिशन क्या है?
Artemis-II मिशन Artemis कार्यक्रम का पहला मानवयुक्त मिशन है। इस मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री Orion अंतरिक्ष यान में बैठकर पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलेंगे और चंद्रमा की दिशा में यात्रा करेंगे।
यह मिशन चंद्रमा पर उतरने वाला नहीं है, बल्कि चंद्रमा के पास से होकर “फ्री रिटर्न ट्रैजेक्टरी” पर जाएगा, जिससे Orion यान बिना अतिरिक्त ईंधन के पृथ्वी पर वापस लौट सके।
इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सभी प्रणालियों को वास्तविक मानव परिस्थितियों में परखेगा, जैसे जीवन समर्थन प्रणाली, संचार प्रणाली, और आपातकालीन सुरक्षा प्रणाली।
Artemis-II एक तरह से Artemis-III के लिए “फाइनल रिहर्सल” है, जहाँ हर छोटी-बड़ी तकनीकी कमी को पहचाना जाएगा।
3. Artemis-I और Artemis-II में गहरा अंतर
Artemis-I एक पूरी तरह से बिना मानव वाला मिशन था, जिसका उद्देश्य Orion और SLS रॉकेट की बुनियादी क्षमताओं की जाँच करना था। उस मिशन में कोई मानव जोखिम नहीं था।
इसके विपरीत Artemis-II में वास्तविक अंतरिक्ष यात्री मौजूद होंगे, जिससे सुरक्षा, विश्वसनीयता और सिस्टम की गुणवत्ता कई गुना अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
Artemis-I ने तकनीकी डेटा दिया, जबकि Artemis-II मानवीय अनुभव, शारीरिक प्रतिक्रिया, और मानसिक प्रभावों का भी अध्ययन करेगा।
4. Artemis-II मिशन के मुख्य उद्देश्य
इस मिशन का पहला और सबसे बड़ा उद्देश्य मानव को सुरक्षित रूप से गहरे अंतरिक्ष में ले जाना और वापस पृथ्वी पर लाना है।
इसके अलावा Orion की जीवन समर्थन प्रणाली, ऑक्सीजन रीसाइक्लिंग, कार्बन डाइऑक्साइड हटाने, और तापमान नियंत्रण की भी पूरी तरह जाँच होगी।
Artemis-II यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में चंद्रमा पर उतरने से पहले कोई भी गंभीर तकनीकी जोखिम न रह जाए।

5. Orion अंतरिक्ष यान: पूर्ण तकनीकी विवरण
Orion अंतरिक्ष यान को विशेष रूप से गहरे अंतरिक्ष में मानव यात्रा के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अब तक का सबसे सुरक्षित मानव अंतरिक्ष यान माना जाता है।
Crew Module शंकु के आकार का होता है, जो पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश के दौरान अत्यधिक तापमान सहन कर सकता है।
Service Module यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा विकसित किया गया है, जो बिजली, पानी, ऑक्सीजन और इंजन शक्ति प्रदान करता है।
Launch Abort System किसी भी आपात स्थिति में मिशन को तुरंत सुरक्षित बना सकता है।
6. Space Launch System (SLS) रॉकेट
SLS दुनिया का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है, जिसे विशेष रूप से Artemis मिशनों के लिए विकसित किया गया है।
इसकी थ्रस्ट क्षमता Saturn-V से भी अधिक है, और यह भारी पेलोड को पृथ्वी की कक्षा से बाहर ले जाने में सक्षम है।
SLS का डिज़ाइन इसे भविष्य के मंगल मिशनों के लिए भी उपयुक्त बनाता है।

7. Artemis-II के अंतरिक्ष यात्री
Artemis-II मिशन में चार अनुभवी अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं, जिनमें NASA और कनाडाई स्पेस एजेंसी के सदस्य हैं।
ये अंतरिक्ष यात्री वर्षों की ट्रेनिंग, सिमुलेशन और आपातकालीन अभ्यास से गुज़रे हैं।
यह मिशन अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मानव एकता का प्रतीक है।
8. Artemis-II मिशन की उड़ान प्रोफ़ाइल (Flight Profile)
Artemis-II मिशन की उड़ान प्रोफ़ाइल को अत्यंत सावधानी और वैज्ञानिक सटीकता के साथ डिज़ाइन किया गया है। यह उड़ान प्रोफ़ाइल इस बात को सुनिश्चित करती है कि अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित रूप से पृथ्वी की कक्षा से बाहर निकलें, चंद्रमा के पास तक पहुँचें और फिर वापस पृथ्वी पर लौट सकें।
मिशन की शुरुआत Florida के Kennedy Space Center से होती है, जहाँ Space Launch System (SLS) रॉकेट Orion अंतरिक्ष यान को लेकर उड़ान भरेगा। प्रक्षेपण के कुछ ही मिनटों बाद रॉकेट पृथ्वी के वातावरण से बाहर निकल जाएगा।
इसके बाद Orion को अस्थायी पृथ्वी कक्षा (Parking Orbit) में स्थापित किया जाएगा, जहाँ सभी सिस्टम्स की अंतिम जाँच की जाएगी। यह चरण अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यहीं से यह निर्णय लिया जाता है कि मिशन को आगे बढ़ाया जाए या नहीं।
इसके बाद Trans-Lunar Injection (TLI) बर्न किया जाएगा, जिससे Orion चंद्रमा की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ेगा। यही वह क्षण होता है जब अंतरिक्ष यात्री आधिकारिक रूप से Deep Space में प्रवेश करते हैं।
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9. चंद्रमा तक की यात्रा और फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी
Artemis-II मिशन में Orion अंतरिक्ष यान “Free Return Trajectory” नामक मार्ग का अनुसरण करेगा। इसका अर्थ है कि यदि किसी कारणवश इंजन बंद भी हो जाए, तो भी यान चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण की मदद से स्वतः पृथ्वी की ओर लौट आएगा।
यह तकनीक Apollo मिशनों के समय भी उपयोग में लाई गई थी, लेकिन Artemis-II में इसे आधुनिक कंप्यूटर, नेविगेशन सॉफ्टवेयर और सटीक गणनाओं के साथ और भी सुरक्षित बनाया गया है।
चंद्रमा के पास पहुँचने पर Orion लगभग 7,400 किलोमीटर की दूरी से चंद्रमा के पास से गुज़रेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की सतह, क्रेटर्स और दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र को नज़दीक से देख पाएँगे।
यह अनुभव केवल वैज्ञानिक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह इंसानों को लंबे समय तक पृथ्वी से दूर रहने के लिए मानसिक रूप से तैयार करेगा।
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10. जीवन समर्थन प्रणाली (Life Support System)
Artemis-II मिशन में Orion की जीवन समर्थन प्रणाली का पहली बार पूर्ण मानव उपयोग में परीक्षण किया जाएगा। यह प्रणाली अंतरिक्ष यात्रियों को ऑक्सीजन, पानी, तापमान नियंत्रण और वायु शुद्धिकरण प्रदान करती है।
इस सिस्टम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ऑक्सीजन और पानी को रीसायकल करने में सक्षम है, जिससे भविष्य के लंबे मिशनों में सप्लाई पर निर्भरता कम होगी।
कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने के लिए विशेष फ़िल्टर और केमिकल रिएक्टर का उपयोग किया जाता है, ताकि केबिन की हवा हमेशा सुरक्षित बनी रहे।
Artemis-II में यह देखा जाएगा कि यह प्रणाली कई दिनों तक बिना किसी रुकावट के इंसानों को जीवित और स्वस्थ रख सकती है या नहीं।
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11. संचार और नेविगेशन सिस्टम
गहरे अंतरिक्ष में संचार बनाए रखना किसी भी मानव मिशन की सबसे बड़ी चुनौती होती है। Artemis-II में NASA का Deep Space Network (DSN) Orion को पृथ्वी से जोड़े रखेगा।
यह नेटवर्क विशाल एंटीना का समूह है, जो पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं, ताकि 24 घंटे संचार संभव हो सके।
नेविगेशन सिस्टम Orion को अपनी सटीक स्थिति, गति और दिशा की जानकारी देता है। यह सिस्टम ऑटोमैटिक और मैनुअल दोनों मोड में काम करता है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में अंतरिक्ष यात्री नियंत्रण ले सकें।
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12. सुरक्षा और आपातकालीन प्रणालियाँ
Artemis-II मिशन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। Orion का Launch Abort System किसी भी आपात स्थिति में Crew Module को रॉकेट से अलग कर सकता है।
इसके अलावा आग, दबाव में कमी, या सिस्टम फेल होने जैसी स्थितियों के लिए विशेष आपात प्रक्रियाएँ बनाई गई हैं।
हर अंतरिक्ष यात्री को इन परिस्थितियों से निपटने के लिए कठोर प्रशिक्षण दिया गया है, जिसमें सिमुलेटर, पानी के नीचे अभ्यास और ज़ीरो-ग्रैविटी फ्लाइट शामिल हैं।
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13. वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयोग
हालाँकि Artemis-II मुख्य रूप से एक परीक्षण मिशन है, फिर भी इसमें कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक और तकनीकी प्रयोग किए जाएंगे।
इन प्रयोगों में मानव शरीर पर Deep Space रेडिएशन के प्रभाव, नींद चक्र, हृदय गति और मानसिक स्थिति का अध्ययन शामिल है।
यह डेटा भविष्य के चंद्र और मंगल मिशनों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
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14. भविष्य के Artemis मिशनों में भूमिका
Artemis-II की सफलता सीधे Artemis-III और आगे के मिशनों की दिशा तय करेगी।
यदि यह मिशन सफल रहता है, तो अगला कदम चंद्रमा की सतह पर मानव को उतारना होगा, जो लगभग आधी सदी बाद होगा।
Artemis-II यह प्रमाणित करेगा कि मानव गहरे अंतरिक्ष में लंबे समय तक सुरक्षित रूप से यात्रा कर सकता है।
15. Artemis-II और भारत के लिए इसका महत्व
Artemis-II मिशन का महत्व केवल अमेरिका या NASA तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया, विशेष रूप से भारत जैसे उभरते अंतरिक्ष राष्ट्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। भारत ने हाल के वर्षों में Chandrayaan, Gaganyaan और Aditya-L1 जैसे मिशनों के माध्यम से अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं को सिद्ध किया है।
Artemis-II से प्राप्त तकनीकी डेटा, मानव जीवन समर्थन प्रणाली, गहरे अंतरिक्ष में संचार, और रेडिएशन सुरक्षा से जुड़ी जानकारियाँ भारत के गगनयान मिशन को और सुरक्षित बनाने में मदद कर सकती हैं।
इसके अतिरिक्त भारत और NASA के बीच अंतरिक्ष सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भविष्य में भारतीय अंतरिक्ष यात्री Artemis से जुड़े मिशनों में भाग ले सकते हैं, जो भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।
Artemis-II यह भी दर्शाता है कि भविष्य का अंतरिक्ष अन्वेषण अकेले किसी एक देश द्वारा नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग से होगा।
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16. Artemis-II बनाम Apollo मिशन
Artemis-II की तुलना यदि Apollo मिशनों से की जाए, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि पिछले 50 वर्षों में अंतरिक्ष तकनीक कितनी आगे बढ़ चुकी है।
Apollo मिशन मुख्यतः शीत युद्ध की राजनीति और तकनीकी प्रदर्शन का परिणाम थे, जबकि Artemis-II का उद्देश्य स्थायी और दीर्घकालिक मानव उपस्थिति बनाना है।
जहाँ Apollo मिशनों में डिजिटल कंप्यूटर बहुत सीमित थे, वहीं Artemis-II में अत्याधुनिक कंप्यूटर, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया गया है।
इसके अलावा Artemis-II सुरक्षा, विविधता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग तीनों के मामले में Apollo युग से कहीं आगे है।
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17. Artemis-II मिशन की चुनौतियाँ और जोखिम
मानव अंतरिक्ष उड़ान हमेशा जोखिम से भरी होती है, और Artemis-II भी इससे अछूता नहीं है। गहरे अंतरिक्ष में रेडिएशन, तकनीकी विफलता, और मानव स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं।
पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर निकलते ही अंतरिक्ष यात्री कॉस्मिक रेडिएशन के संपर्क में आते हैं, जो लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।
इसके अलावा किसी भी प्रणाली की विफलता मिशन को गंभीर संकट में डाल सकती है। इसीलिए Artemis-II से पहले हज़ारों घंटे के ग्राउंड टेस्ट और सिमुलेशन किए गए हैं।
इन चुनौतियों के बावजूद, NASA का मानना है कि Artemis-II में उपयोग की गई सुरक्षा प्रणालियाँ मानव उड़ान को अब तक की सबसे सुरक्षित उड़ानों में से एक बनाएँगी।
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18. Artemis-II मिशन की वर्तमान स्थिति
वर्तमान समय में Artemis-II मिशन अंतिम परीक्षण और एकीकरण चरण में है। Orion अंतरिक्ष यान, SLS रॉकेट और सभी सहायक प्रणालियों की कठोर जाँच की जा रही है।
NASA का लक्ष्य है कि मिशन से पहले हर संभावित तकनीकी खामी को दूर किया जाए, ताकि अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
मिशन की समय-सीमा में तकनीकी कारणों से बदलाव संभव है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य “सुरक्षा पहले” नीति पर आधारित है।
Artemis-II जैसे मिशन में देरी को असफलता नहीं, बल्कि सावधानी और ज़िम्मेदारी का संकेत माना जाता है।
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19. मानवता के लिए Artemis-II का महत्व
Artemis-II केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के भविष्य की दिशा तय करने वाला कदम है। यह मिशन यह साबित करता है कि मानव अब भी अन्वेषण की भावना से प्रेरित है।
चंद्रमा की ओर मानव की वापसी वैज्ञानिक जिज्ञासा, तकनीकी नवाचार और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देने का कार्य करेगी।
यह मिशन शिक्षा, विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में लाखों युवाओं को प्रेरित करेगा कि वे अंतरिक्ष विज्ञान को करियर के रूप में अपनाएँ।
Artemis-II यह संदेश देता है कि मानवता सीमाओं में बंधी नहीं है, और ब्रह्मांड में हमारी यात्रा अभी शुरू हुई है।
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20. निष्कर्ष: Artemis-II – भविष्य की ओर पहला मानव कदम
Artemis-II मिशन मानव अंतरिक्ष इतिहास का एक निर्णायक मोड़ है। यह Apollo युग और भविष्य के मंगल अभियानों के बीच एक मजबूत पुल का कार्य करता है।
इस मिशन के माध्यम से मानव एक बार फिर यह सिद्ध करेगा कि वह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी नवाचार और साहस के साथ आगे बढ़ सकता है।
Artemis-II से मिलने वाला अनुभव, डेटा और आत्मविश्वास Artemis-III, चंद्र बेस और मंगल मिशनों की नींव बनेगा।
अंततः Artemis-II सिर्फ चंद्रमा तक की यात्रा नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के अगले अध्याय की शुरुआत है। यह मिशन आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगा कि जब मानव ने सितारों की ओर देखने का साहस किया, तो उसने अपने भविष्य को रोशन किया।
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